ब्रजनंदन सहाय ‘ब्रजवल्लभ’: जिन्होंने आधुनिक हिन्दी को प्रथम मौलिक उपन्यास दिया :डा अनिल सुलभ

स्मृति-दिवस (२० अक्तूबर) पर विशेष पटना : आधुनिक हिन्दी को प्रथम मौलिक उपन्यास (सौंदर्योपासक) प्रदान करने वाले महान हिन्दी-सेवी श्री ब्रजनंदन सहाय ‘ब्रजवल्लभ’, एक ऐसे मनीषी साहित्यकार थे, जो अपनी कठोर साधना के कारण बीसवीं सदी के साहित्याकाश में उषाकाल के सूर्य की भाँति प्रणम्य माने जाने हैं। वे अपने युग में साहित्यिक प्रतिभा के […]

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महान शब्द-शिल्पी और भावितात्मा साहित्यर्षि थे आचार्य शिवपूजन सहाय :डा अनिल सुलभ

जयंती (९ अगस्त) पर विशेष पटना : हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देने वाले महान शब्द-शिल्पी आचार्य शिवपूजन सहाय एक ऐसे विनम्र साहित्यकार और संपादक थे, जिन्हें साहित्यर्षि कहा जाना अधिक उपयुक्त होगा। उनकी विनम्रता और सरलता, पूज्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृति कराती थी। उनके हृदय में साहित्य […]

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‘गीता’ के जीवंत विग्रह थे जगत नारायण प्रसाद ‘जगतबंधु’:डा अनिल सुलभ

जयंती (२२ जुलाई) पर विशेष पटना : अद्भुत और अनुकरणीय व्यक्तित्व था उनका! ९२ वर्ष की आयु में भी ७२ वर्ष के लगते थे! कुर्ता-पायज़ामा के ऊपर बंडी पहने हुए, साक्षात जीवंतता की दीप्ति से चमकते और मुस्कुराते हुए! उन्होंने भारतीय वांगमय के सूत्र-ग्रंथ ‘गीता’ का न केवल महनीय हिन्दी भाष्य लिखा, बल्कि उसे अपने […]

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संत-साहित्य के ऋषि-अनुशीलक थे आचार्य धर्मेंद्र ब्रह्मचारी शास्त्री:डा अनिल सुलभ

स्मृति-दिवस ( १९ जुलाई) पर विशेष पटना :विद्वता और विद्वता जनित विनम्रता, सुहृदता और कांति से दीप्त डा धर्मेंद्र ब्रह्मचारी शास्त्री संत-साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान और अनुशीलक थे। उन्होंने हस्त-लिखित दुर्लभ ग्रंथों का गहन अनुशीलन किया था। संत-साहित्य के अनेक दुर्लभ ग्रंथों को प्रकाश में लाने का श्रेय भी शास्त्री जी को जाता है। उन्होंने […]

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साहित्यिक संत थे प्रज्ञा-पुरुष मदन मोहन पाण्डेय : डा अनिल सुलभ

जयंती ( १३ जुलाई ) पर विशेष पटना : साहित्य-संसार में अनेक ऐसी स्तुत्य विभूतियाँ हुई हैं, जिन्हें पर्याप्त औपचारिक शिक्षा के अवसर नही मिले, किंतु उन्होंने स्वाध्याय और चिंतन से वह विभूति पायी, जिससे संसार को विपुल प्रकाश प्राप्त हुआ। उन्हीं विभूतियों में, बिहार के साधु साहित्यकार, पत्रकार और प्रकाशक प्रणम्य पुरुष मदन मोहन पाण्डेय […]

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अन्वेषण-धर्मी एकांतिक साधक थे डा सुरेंद्र प्रसाद जमुआर :डा अनिल सुलभ

जयंती ( १ जुलाई) पर विशेष पटना : वर्ष का स्मरण नही है। संभवतः २००८ की सर्दियों के दिन थे। मेरे फ़ोन की घंटियाँ बजी! उधर से आवाज़ आई- “ मैं जमुआर बोल रहा हूँ— सुरेंद्र प्रसाद जमुआर ! आप क्या सुलभ जी बोल रहे हैं?” मैंने उत्तर दिया- ‘जी हाँ ! बोल रहा हूँ।’ […]

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महान स्वतंत्रता-सेनानी,चिंतक और हिन्दीसेवी थे साँवलिया बिहारी लाल वर्मा :डा अनिल सुलभ

जयंती (१८ जून ) पर विशेष पटना। विधि और अर्थ-शास्त्र के यशस्वी विद्वान साँवलिया बिहारी लाल वर्मा भारत के एक ऐसे आदरणीय महापुरुष थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश और समाज को समर्पित कर दिया था और अनेक आयामों से राष्ट्र और राष्ट्रभाषा की सेवा की। उनका दिव्य और आकर्षक व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे बहुगुणी […]

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जीवन के प्रति राग और उत्साह के कवि थे पं रामदेव झा :डा अनिल सुलभ

जयंती (११जून ) पर विशेष हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति जीवन-पर्यन्त अकूँठ भक्ति रखने वाले सुकवि पं रामदेव झा, हिन्दी काव्य-संसार में, उत्तर-छायावाद काल के एक प्रतिष्ठित तथा जीवन के प्रति राग और उत्साह का दम भरने वाले कवि थे। उनके संपूर्ण साहित्य में, सर्वत्र ही प्रेम, करुणा और आस्था का मंत्र गूँजता है। […]

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पुरानी पीढ़ी के ऋषि-तुल्य हिन्दी-सेवी थे दामोदर सहाय ‘कविकिंकर’:डा अनिल सुलभ

पुण्य-स्मृति-दिवस (८ जून) पर विशेष कविकिंकर का जन्म सारण में १४ दिसम्बर १८७५ को हुआ था पटना । अपने समय के अत्यंत आदरणीय कवि दामोदर सहाय ‘कविकिंकर’ एक प्रणम्य और ऋषि-तुल्य कवि थे। एक ऐसे स्वनाम-धन्य कवि, जिनके ‘कवि’ का उद्भव पीड़ा के सागर से ‘कमल’ सदृश हुआ था। इनकी माँ तब चल बसी जब […]

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‘प्रकृति-राग’ के कृतात्मा कवि थे कलक्टर सिंह’केसरी’:डा अनिल सुलभ

१११वीं जयंती ( ५ जून) पर विशेष उनकी प्रथम काव्य-कृति ‘मराली’ सन १९३९ में प्रकाशित हुईपटना। प्रकृति के मुग्धकारी रूप और सुषमा को काव्य में पिरोनेवाले कृतात्मा कवि कलक्टर सिंह ‘केसरी’ पिछली पीढ़ी के एक ऐसे कवि और विद्वान आचार्य हैं जिन्हें ‘प्रकृति-राग’ का अमर गायक माना जाता है। आधुनिक हिन्दी के काव्य-इतिहास में केसरी जी […]

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