मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चों का हाल जानने मुजफ्फरपुर पहुंचे मुख्यमंत्री

पटना बिहार विविध

अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन किया
इंसेफेलाइटिस से 14 दिन में 133 बच्चों की मौत

मुजफ्फरपुर /पटना। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चों का हाल जानने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर पहुंचे।श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में उन्होंने आईसीयू में बच्चों को देखा और उनके परिजनों से बात की। डॉक्टर्स से इलाज की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टर्स से कहा कि मस्तिष्क ज्वर के लिए कोई वायरस जिम्मेदार है, इसका पता लगाना होगा ।

14 दिनों में एईस से 133 बच्चों की हो चुकी है मौत

वहीं एसकेएमसीएच के बाहर पीड़ित बच्चों के परिजनों को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिए जाने पर हंगामा हो गया। ये लोग अस्पताल की खराब स्थिति से नाराज थे। लोगों का कहना था कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर बात कहना चाहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें मिलने नहीं दे रहा है। रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्यमंत्री अश्वनी चौबे मुजफ्फरपुर पहुंचे थे तो उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा था। पटना एयरपोर्ट पर डॉ. हर्षवर्धन को काले झंडे भी दिखाए गए थे। बीते 14 दिनों में एईस से 133 बच्चों की मौत हो चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री के न पहुंचने को लेकर लगातार विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे थे।

151 बच्चे दो बड़े अस्तपालों में हैं भर्ती
मस्तिष्क ज्वर से सोमवार को 6 और बच्चों की मौत हो गई। 21 की हालत गंभीर बनी हुई है। एसकेएमसीएच समेत मुजफ्फरपुर के दो बड़े अस्पताल में 151 बच्चे हैं। इलाज के अभाव में मासूमों की मौत का सिलसिला जारी है। पर बीमारी क्या है? इस बारे में डॉक्टर अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। डॉक्टर यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि बच्चों को दवा किस बीमारी की दें। औसतन यहां हर तीन घंटे में एक बच्चे की मौत हो गई।

एसकेएमसीएच की हालत यह है कि यहां एक बेड पर तीन-तीन बच्चे हैं। आईसीयू में गंभीर बच्चों की संख्या बढ़ जाने पर सामान्य वार्ड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी के कारण बच्चों में ग्लूकोज और सोडियम की कमी होती है। इलाज के नाम पर उन्हें यही चढ़ाया जा रहा है। जो बच्चे बच गए तो ठीक, नहीं तो उनकी मौत तय है।
अब बारिश का इंतजार
एईएस का मुकाबला करने में नाकाम प्रशासन अब बारिश के इंतजार में है, क्योंकि बारिश के बाद यह बीमारी अक्सर थम जाती है। एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर के शिशु रोग विभाग के प्रमुख डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने बताया कि बीमारी न तो वायरल है और न ही इंसेफेलाइटिस। पुणे, दिल्ली या देश ही नहीं, अटलांटा के बेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट में भी इसकी जांच हो चुकी है। कहीं भी वायरस नहीं मिला। लीची से भी कुछ लोग इस बीमारी को जोड़ते हैं। लेकिन, इसका कहीं से संबंध साबित नहीं हुआ है। 2005 में मैंने इस पर शोध किया। मैंने यही पाया है कि जब भी तापमान 38 से अधिक और आर्द्रता 60-65 पहुंचती है, इस बीमारी के मामले सामने आने लगते हैं। मौसम इस बीमारी की मुख्य वजह है।

पांच साल में नहीं बदले हालात
बिहार में 2014 में बच्चों की मौतें हुईं तो 22 जून 2014 को पटना आए तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यहां 100 बेड का अलग अस्पताल बनाने का वादा किया था। अब मस्तिष्क ज्वर से फिर लगातार हालात बिगड़े तो 5 साल बाद यानी 16 जून 2019 केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वादा दोहराया। उन्होंने शोध की बात फिर कही। 100 बेड के अस्पताल और शोध की बात दोहराई।

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