अत्यंत प्रतिभाशाली कवि, कलाकार और संचारविद थे पुरुषोत्तम नारायण सिंह : अनिल शुलभ

बिहार

असामयिक निधन से साहित्य और सांस्कृतिक समाज में शोक की लहर,साहित्य सम्मेलन ने गहरा दुःख व्यक्त किया ।

पटना : दूरदर्शन केंद्र पटना के पूर्व निदेशक और सुप्रसिद्ध कवि कलाकार पुरुषोत्तम नारायण सिंह नहीं रहे।मधुबनी ज़िले के राजनगर में पहली जनवरी, १९५८ को जन्मे श्री सिंह ने, ६३ वर्ष की आयु में, हरियाणा के झज्जर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में,शुक्रवार की मध्य रात्रि में ११-३० बजे अपनी अंतिम साँस ली। वे कोरोना से पीड़ित थे। उनके निधन से संपूर्ण साहित्य-समाज, संस्कृति-कर्मियों और प्रबुद्ध जनों में गहरा शोक व्याप्त है। 

अपने शोकोदगार में, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा है कि श्री सिंह के निधन से एक अत्यंत प्रतिभाशाली कवि, बाँसुरी के मर्मज्ञ कलाकार और एक निष्णात संचारविद को हमने खो दिया है। वे अनेक सद्गुणों से युक्त एक ऐसे ज़िंदादिल व्यक्तित्व थे, जिनके आकर्षण-पाश से कोई भी सुहृद व्यक्ति बच नहीं सकता था। उनके गीत ‘जय भारत जय इंडिया’ को व्यापक प्रसिद्धि मिली थी। उनके काव्य-संग्रह ‘सन्नाटे का शोर’ को भी पाठकों ने बड़े प्रेम से स्वीकार किया था, जिसमें उनकी काव्य-कल्पनाएँ अपनी आत्मा के स्वर के साथ प्रस्फुटित हुईं थी। काव्य-मंचों पर वे प्रायः आमंत्रित किए जाते थे। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति द्वारा मध्यप्रदेश के खरगौन और इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय कवि-सम्मेलनों में उनके साथ मुझे भी भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ था। मध्यप्रदेश की पूरी साहित्यिक यात्रा में, हम दोनों एक ही साथ रहे। एक ही कक्ष में। वे एक अत्यंत सज्जन, सहृदय और प्रेमी व्यक्ति थे। उनके निधन से मैंने अपना एक अत्यंत आत्मीय और प्रेरक मित्र को खो दिया है। यह अत्यंत दुखद है कि उनकी एक मात्र संतान, एक मात्र पुत्र ‘आलाप’ को कोरोना ने दो दिन पूर्व ही उनसे छीन लिया था और उनके भी प्राण हर लिए। अब उनके परिवार में दहाड़ मारती, मात्र दो विधवाएँ, पत्नी संध्या सिंह, पुत्रवधू और एक सवा वर्षीया पौत्री रह गईं हैं। ! इनकी दारुण दशा की कल्पना करते हीं आत्मा काँप उठती है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को सद्गति तथा उनके परिजनों को यह असह्य दुःख को सहने की शक्ति दे।

शोक प्रकट करनेवालों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवि पं सुरेश नीरव, डा सुरेश अवस्थी, कवयित्री शेफालिका वर्मा, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा भूपेन्द्र कलसी, डा अंजुम बाराबंकवी, डा शम्भु सिंह मनहर, डा सागरिका राय, कुमार अनुपम, पूनम आनंद, विजय गुंजन, ‘साँझाबाती’ के संपादक हेमंत कुमार, डा सुलक्ष्मी कुमारी, सुनील कुमार दूबे, डा ध्रुब कुमार, डा मेहता नगेंद्र सिंह, मुकेश प्रत्युष, आरपी घायल, डा विनय कुमार विष्णुपुरी, डा अशोक प्रियदर्शी, डा शालिनी पाण्डेय, डा अर्चना त्रिपाठी, डा श्वेता सिंह, किशोर सिन्हा, शमा कौसर, डा अशोक कुमार ज्योति, विभा रानी श्रीवास्तव, किरण सिंह, अंकेश कुमार, अनुपमा नाथ, माधुरी, डा रमेशचंद्र पाण्डेय, कृष्ण रंजन सिंह, डा पल्लवी विश्वास, डा अमरनाथ प्रसाद, आराधना प्रसाद, डा मंगला रानी, पूनम देवा, डा नम्रता कुमारी, साइश्ता अंजुम, पूनम सिन्हा श्रेयसी,रागिनी भारद्वाज, इन्दु उपाध्याय, अभिलाषा कुमारी, हेमा सिंह, डा अरुण सज्जन, डा आरती कुमारी, ऋचा वर्मा, डा निगम प्रकाश नारायण, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, डा विभा माधवी, कहकशां तौहीद, चंदा मिश्र, राज किशोर झा, रीना सोपम, डा मनोज कुमार आदि दर्जनों नाम सम्मिलित हैं।

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